नदी-नहरों पर बने पुलों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल गोंडा सहित कई जिलों में टूटी रेलिंग, अनदेखी से बढ़ रहा खतरा

गोंडा समेत कई जिलों में नदी-नहर पुलों की टूटी रेलिंग और सुरक्षा अनदेखी से बढ़ा खतरा, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल।

गोंडा समेत कई जिलों में नदी-नहर पुलों की टूटी रेलिंग और सुरक्षा अनदेखी से बढ़ा खतरा, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल।

लेखक: सुनील चौधरी, Editor in Chief, JaiBharatSamachar

भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है। गाँवों को जोड़ने वाली सड़कें और उन पर बने पुल केवल कंक्रीट की संरचनाएँ नहीं, बल्कि विकास की जीवनरेखा हैं। परंतु जब इन्हीं पुलों की सुरक्षा दीवारें (रेलिंग) टूट जाएँ, संकेतक न हों, और प्रशासनिक उदासीनता हावी हो जाए, तब यह जीवनरेखा ही दुर्घटनाओं का कारण बन जाती है।

हाल ही में गोंडा सहित आसपास के क्षेत्रों में नदी-नहरों पर बने कई पुलों और पुलियों की रेलिंग टूटी हुई पाई गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई स्थानों पर सुरक्षा दीवारें वर्षों से क्षतिग्रस्त हैं, लेकिन संबंधित विभाग ने अब तक स्थायी मरम्मत नहीं कराई। यह स्थिति केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे-सीधे जनसुरक्षा से खिलवाड़ है।

हादसे चेतावनी दे रहे हैं

पिछले दिनों हुई दुर्घटनाओं ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। एक मामले में वाहन असंतुलित होकर नहर में गिर गया, जिसमें जानमाल का नुकसान हुआ। दूसरे प्रकरण में रात के समय बाइक सवार पुल से फिसलकर नीचे जा गिरा। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पुलों पर न तो पर्याप्त रोशनी है, न ही चेतावनी बोर्ड, और कई जगहों पर मोड़ बेहद खतरनाक हैं।

जब पुल की रेलिंग टूटी हो और संकेतक भी न लगे हों, तो रात के अंधेरे में वाहन चालक के लिए जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। सवाल यह है कि क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है?

1911 में बना पुल, आज बदहाल

जानकारी के अनुसार, कुछ पुलों का निर्माण अंग्रेज़ी शासनकाल में हुआ था। समय के साथ यातायात का दबाव कई गुना बढ़ चुका है, लेकिन संरचना की मजबूती और सुरक्षा उपायों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। कहीं रेलिंग गायब है, तो कहीं आधी टूटी हुई।

यह विडंबना है कि जिस पुल ने सौ वर्ष से अधिक समय तक सेवा दी, उसकी वर्तमान स्थिति पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा। क्या हमारी विकास योजनाओं में रखरखाव (maintenance) प्राथमिकता नहीं है?

प्रशासन की भूमिका पर प्रश्न

स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायतें कीं, ज्ञापन दिए, परंतु कार्यवाही कागज़ों तक सीमित दिखती है। यदि सीओ या अन्य अधिकारियों द्वारा निरीक्षण के बाद भी संकेतक न लगें और मरम्मत न हो, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

सड़क और पुल विभाग का दायित्व केवल निर्माण कर देना नहीं, बल्कि नियमित निरीक्षण और समयबद्ध मरम्मत सुनिश्चित करना भी है। जनप्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी है कि वे इस विषय को प्राथमिकता से उठाएँ।

जनसुरक्षा सर्वोपरि क्यों नहीं?

हम अक्सर बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की चर्चा करते हैं, लेकिन छोटे ग्रामीण पुलों की अनदेखी हो जाती है। जबकि सच्चाई यह है कि इन्हीं रास्तों से किसान अपनी उपज मंडी तक पहुँचाते हैं, बच्चे स्कूल जाते हैं, और आम नागरिक रोज़गार के लिए आवाजाही करते हैं।

यदि सुरक्षा दीवारें टूटी हों और पुल संकरे हों, तो हर गुजरता वाहन संभावित दुर्घटना का खतरा बन जाता है। यह केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी का प्रश्न है।

समाधान क्या हो?

  1. तत्काल सर्वे और ऑडिट – सभी पुलों की सुरक्षा स्थिति का तकनीकी ऑडिट कराया जाए।

  2. आपातकालीन मरम्मत – टूटी रेलिंग और क्षतिग्रस्त हिस्सों की तुरंत मरम्मत हो।

  3. रिफ्लेक्टर और संकेतक – खतरनाक मोड़ों और संकरे पुलों पर चेतावनी बोर्ड, स्पीड लिमिट और रिफ्लेक्टर लगाए जाएँ।

  4. रात में रोशनी की व्यवस्था – सोलर लाइट या अन्य स्थायी प्रकाश व्यवस्था अनिवार्य की जाए।

  5. जवाबदेही तय हो – यदि शिकायतों के बावजूद कार्यवाही न हो, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

विकास बनाम उपेक्षा

भारत आज विश्व पटल पर उभरती शक्ति है। हम Expressways, Bullet Trains और Smart Cities की बात करते हैं। लेकिन यदि गाँव की नहर पर बना छोटा पुल ही सुरक्षित न हो, तो यह विकास अधूरा है।

हमारा मानना है कि सच्चा राष्ट्रनिर्माण तभी होगा जब अंतिम पंक्ति में खड़े नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित हो। पुलों की टूटी रेलिंग केवल ईंट-गारे का मसला नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की संवेदनशीलता की परीक्षा है।

JaiBharatSamachar की अपील

हम संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों से आग्रह करते हैं कि इस विषय को गंभीरता से लें। हादसे होने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं, बल्कि हादसे रोकना प्रशासन का कर्तव्य है।

जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह लापरवाही और बड़े हादसों को जन्म दे सकती है।

— सुनील चौधरी
Editor in Chief, JaiBharatSamachar

भारत की प्रगति का मार्ग सुरक्षित पुलों और मजबूत व्यवस्था से होकर ही गुजरेगा। अब समय है कि जिम्मेदारियाँ निभाई जाएँ।

Logo Jai Bharat Samachar

Jai Bharat Samachar

News Analysis and Social Commentary with Responsibility

Guruji Sunil Chaudhary on Facebook

Get Latest News

Logo Jai Bharat Samachar

Social and Political Commentar, Nationalist, Mission to Make Positive Impact

Email suniltams@gmail.com

Guruji Sunil Chaudhary, India's Leading Digital Coach

Guruji Sunil Chaudhary

Newsletter

Subscribe now to get daily updates.

Created with © FREE Super System