सलार गाज़ी का सच! संभल में मेले पर रोक क्यों? | भारत की संस्कृति पर हमला?

सलार गाज़ी का सच! संभल में मेले पर रोक क्यों? | भारत की संस्कृति पर हमला?

🚩 क्या भारत में अब भी लुटेरों और आक्रांताओं की पूजा होगी? 🚨 संभल में 'नेजा मेला' पर रोक क्यों लगी?सलार गाज़ी कौन था, और उसे सूफी संत क्यों बना दिया गया?

आज हम एक ऐसे विषय पर चर्चा करेंगे जो भारत की संस्कृति और इतिहास से जुड़ा हुआ है, लेकिन वर्षों से इस पर झूठी कहानियाँ गढ़ी गई हैं। आज हम जानेंगे सलार गाज़ी का असली इतिहास और संभल में 'नेजा मेला' पर रोक के पीछे का सच।

🔴 सलार गाज़ी कौन था? इतिहास का काला अध्याय

सलार गाज़ी कोई सूफी संत नहीं था, बल्कि वह महमूद गजनवी का भांजा और इस्लामी आक्रांता था।

📜 सलार गाज़ी का इतिहास:

  • महमूद गजनवी के साथ भारत पर पहला आक्रमण किया।

  • सोमनाथ मंदिर को लूटने और हिंदू संस्कृति को नष्ट करने में उसकी भूमिका थी।

  • बहराइच में हिंदू राजा सुहेलदेव ने उसे हराकर मार डाला।

  • एक आक्रांता, लुटेरा और जिहादी कमांडर था, जिसे बाद में सूफी संत घोषित कर दिया गया!

👉 सोचिए, जो व्यक्ति भारत पर हमला करने आया, जिसने हिंदुओं का नरसंहार किया, वह अचानक सूफी संत कैसे बन गया?

⚠️ इतिहास कैसे बदला गया? सलार गाज़ी से ‘सूफी संत’ तक का सफर

1250 ई. में, यानी उसकी मौत के 200 साल बाद, उसकी कब्र को एक 'दरगाह' में बदल दिया गया।

📌 कैसे हुआ यह बदलाव? 1️⃣ उसकी कब्र को मकबरे में बदल दिया गया। 2️⃣ धीरे-धीरे हिंदू समाज को यह सिखाया गया कि वह कोई महान फकीर था। 3️⃣ लोगों को कहा गया कि उसकी मजार पर जाकर चादर चढ़ाने से मनोकामनाएँ पूरी होंगी। 4️⃣ फिर उसके नाम पर हर साल मेले लगने लगे, जहाँ हिंदुओं को भी बुलाया जाने लगा।

👉 यही वामपंथी नैरेटिव की ताकत है – वे आक्रांताओं को सूफी बना देते हैं और हिंदुओं को उनके ही विनाशकों की पूजा करने पर मजबूर कर देते हैं!

🚨 संभल में ‘नेजा मेला’ पर रोक क्यों लगी?

संभल में हर साल ‘नेजा मेला’ नाम का आयोजन किया जाता था, जिसमें सलार गाज़ी को याद किया जाता था।

🚩 पुलिस ने इस पर रोक क्यों लगाई?

🔴 क्योंकि यह मेला भारत पर हमला करने वाले आक्रांता के नाम पर आयोजित किया जाता था। 🔴 क्योंकि यह एक विदेशी आक्रांता का महिमामंडन करता था। 🔴 क्योंकि यह सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा दे सकता था।

👉 संभल पुलिस ने सही कदम उठाते हुए इस पर रोक लगा दी, और कहा –"भारत में किसी आक्रांता के नाम पर उत्सव नहीं होगा!"

⚡ वामपंथी और सेक्युलर गिरोह का रोना-धोना!

🔴 अखिलेश यादव और उनके समर्थक इसे ‘मिली-जुली संस्कृति पर हमला’ बता रहे हैं। 🔴 कुछ सेक्युलर पत्रकार इसे ‘सांप्रदायिक सौहार्द’ का प्रतीक बता रहे हैं। 🔴 लेकिन सवाल उठता है – क्या हम भारत में ऐसे मेले मनाएँगे जो लुटेरों और आक्रांताओं को महिमा मंडित करें?

👉 कौन से देश अपने विनाशकों की पूजा करते हैं? क्या कोई जर्मनी में हिटलर का जश्न मनाएगा? क्या कोई फ्रांस में नेपोलियन की हार का उत्सव मनाएगा? फिर भारत में क्यों?

🚀 हिंदू समाज के लिए चेतावनी – अब जागो!

📢 अब समय आ गया है कि हिंदू समाज अपनी संस्कृति को पहचाने और अपने दुश्मनों को समझे!

🚩 अगर आज हम नहीं जागे, तो हमारे मंदिरों को तोड़ने वालों को हीरो बनाया जाता रहेगा! 🚩 अगर आज हम खड़े नहीं हुए, तो हमारी आने वाली पीढ़ियों को यही सिखाया जाएगा कि गजनवी, औरंगजेब और सलार गाज़ी संत थे! 🚩 हमें अपने असली नायकों को याद रखना होगा – महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, राजा सुहेलदेव!

💡 निष्कर्ष – अब क्या करना चाहिए?

भारत के असली नायकों को पहचानो, आक्रांताओं को नहीं!ऐसे झूठे नैरेटिव्स को बेनकाब करो!अपने बच्चों को सही इतिहास पढ़ाओ!हिंदू समाज को इस मानसिक गुलामी से बाहर निकालो!

📢 आपका कर्तव्य: 👉 इस लेख को हर हिंदू तक पहुँचाइए! 👉 अपने मित्रों और परिवार को जागरूक करें! 👉 सोशल मीडिया पर शेयर करें और सच फैलाएँ!

🚩 जय श्रीराम! वंदे मातरम्! भारत माता की जय! 🚩🔥

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