मैं TandavAcharya Sunil Chaudhari आपसे एक सीधी, कड़वी लेकिन ज़रूरी बात करना चाहता हूँ।
आज वीर भोग्या वसुंधरा बहुत लोग बोल रहे हैं, पोस्ट कर रहे हैं, स्टेटस लगा रहे हैं —
लेकिन समझ बहुत कम लोग रहे हैं।
और जो बात समझी नहीं जाती,
वह या तो नारेबाज़ी बन जाती है
या गलतफहमी।
आज इस लेख में मैं कोई भाषण नहीं दूँगा,
मैं आपको आईना दिखाऊँगा।
“वीर भोग्या वसुंधरा” का सीधा अर्थ
तीन शब्द हैं, पर तीनों जीवन बदलने वाले हैं—
वीर – जो डर के बावजूद खड़ा होता है
भोग्या – जो भोगने का अधिकारी है
वसुंधरा – यह धरती, यह राष्ट्र, यह समाज
👉 मतलब साफ है:
यह धरती उसी की है जो वीर है।
जो बोले नहीं,
जो रोए नहीं,
जो जिम्मेदारी से भागे नहीं।
सबसे बड़ा झूठ: अधिकार बिना कर्म के
आज समाज में सबसे खतरनाक वायरस है —
👉 “मुझे अधिकार चाहिए”
लेकिन जब मैं पूछता हूँ:
तुमने क्या कर्म किया?
क्या जिम्मेदारी उठाई?
क्या जोखिम लिया?
तो जवाब आता है —
सिस्टम खराब है,
समाज गलत है,
दूसरे ज़्यादा ले गए।
मैं साफ कहता हूँ:
👉 जो केवल मांगता है,
👉 जो केवल रोता है,
👉 जो दूसरों की मेहनत पर जीना चाहता है —
वह वसुंधरा का अधिकारी नहीं,
वह सिर्फ भीख का अधिकारी है।
और भीख कभी सम्मान नहीं देती।
वीर कौन होता है? (ध्यान से पढ़ना)
वीर कोई जन्म से नहीं होता।
वीर कोई जाति से नहीं होता।
वीर कोई नारे से नहीं होता।
वीर बनना पड़ता है।
वीर को डर लगता है, लेकिन वह रुकता नहीं
वीर गिरता है, लेकिन भागता नहीं
वीर अन्याय देखता है, तो चुप नहीं रहता
वीर कर्मठ होता है, रोज़ काम करता है
वीर जिम्मेदारी लेता है, बहाने नहीं
अगर आप रोज़ अपने जीवन में
कर्म से भाग रहे हैं,
तो माफ़ कीजिए —
आप वीर नहीं हैं।
भोग्या: भोग कौन करेगा?
अब सबसे गलत समझा गया शब्द — भोग्या।
भोग्या का मतलब ऐयाशी नहीं है।
भोग्या का मतलब लूट नहीं है।
भोग्या का मतलब दूसरों का हक़ मारना नहीं है।
भोग्या का मतलब है —
👉 जो संभाल सके, वही भोगे।
👉 जो रक्षा कर सके, वही उपभोग करे।
इसलिए कहा गया:
अगर किसी अयोग्य व्यक्ति को बहुत धन दे दो,
कुछ समय बाद वह नष्ट हो जाएगा।
क्यों?
क्योंकि क्षमता बिना अधिकार विनाश लाता है।
कर्म और धर्म: सनातन का मूल नियम
हमारी सनातन परंपरा कभी आलस नहीं सिखाती।
वह कहती है—
कर्म करो, फल अपने आप आएगा
धर्म की रक्षा करो, धरती तुम्हारी रक्षा करेगी
👉 अधिकार जन्म से नहीं आता
👉 अधिकार भाषण से नहीं आता
👉 अधिकार कर्म से आता है
यही कारण है कि मैंने हमेशा कहा है:
कर्म ही असली पूजा है।
हर व्यक्ति के लिए वीरता का अलग रूप
वीरता तलवार से ही नहीं होती।
आज के समय में—
किसान के लिए वीरता = खेत में डटे रहना
व्यापारी के लिए वीरता = ईमानदार उद्यम
शिक्षक के लिए वीरता = सत्य शिक्षा
विद्यार्थी के लिए वीरता = अनुशासन
सैनिक के लिए वीरता = बलिदान
👉 वीर वही है जो अपना कर्तव्य पूरा करता है,
चाहे वह दिखे या न दिखे।
“वीर भोग्या वसुंधरा” अहंकार नहीं है
बहुत लोग डरते हैं कि यह वाक्य अहंकार सिखाता है।
नहीं।
मैं साफ कहता हूँ:
यह वाक्य अधिकार नहीं, जिम्मेदारी सौंपता है।
यह कहता है—
अगर धरती चाहिए, तो रक्षा भी करो
अगर समाज चाहिए, तो योगदान भी दो
अगर राष्ट्र चाहिए, तो बलिदान के लिए तैयार रहो
आज का सबसे बड़ा प्रश्न
मैं आपसे एक सवाल पूछता हूँ —
ईमानदारी से उत्तर देना:
👉 क्या आप सच में वीर बनना चाहते हैं?
या
👉 सिर्फ पीड़ित बनकर सहानुभूति लेना चाहते हैं?
अगर आप वीर बनना चाहते हैं,
तो आपको
निर्णय लेने होंगे
संघर्ष स्वीकार करना होगा
बहाने छोड़ने होंगे
मेरा सीधा संदेश
मैं TandavAcharya Sunil Chaudhari आपसे यही कहूँगा—
वीर भोग्या वसुंधरा कोई नारा नहीं है।
यह एक जीवन शैली है।
यह एक दैनिक अनुशासन है।
यह एक राष्ट्र निर्माण की शपथ है।
अगर इस धरती पर अधिकार चाहिए,
तो पहले इसके लिए
👉 खड़े होना सीखो
👉 लड़ना सीखो
👉 जिम्मेदारी उठाना सीखो
अंतिम पंक्तियाँ
छोटा-छोटा कर्म रोज़ करो।
बड़ा बदलाव निश्चित है।
क्योंकि
हम वीर हैं
और जिम्मेदारी हमारे ऊपर है।
जय सनातन 🚩
वंदे मातरम् 🇮🇳

Social and Political Commentar, Nationalist, Mission to Make Positive Impact
Email suniltams@gmail.com

Guruji Sunil Chaudhary
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